20 से 25 हज़ार रुपए किलो बिकने वाली कुदरती मशरूम गुच्छी इस बार खूब मिल रही है जंगलों में
20 से 25 हज़ार रुपए किलो बिकने वाली कुदरती मशरूम गुच्छी इस बार खूब मिल रही है जंगलों में
शिमला: 31 मार्च 2023
मशरूम का स्वाद चखा होगा अपने जो न सिर्फ खाने में लजीज होता है बल्कि उसमे प्रचूर मात्रा में प्रोटीन और न्यूट्रिएंट्स भरे रहते हैं. बाजार में कई तरह के मशरूम मिलते हैं लेकिन एक मशरूम की ऐसी भी प्रजाति होती है जिसकी गिनती दुनिया के सबसे महंगी सब्जियों में होती है। दुनिया के सबसे महंगे मशरूम का नाम है गुच्छी मशरूम जिसे जंगली मशरूम या Wild Mushroom कहा जाता है।
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक और जीवनोपयोगी सबसे मंहगी सब्जी है. (गुच्छी) सबसे दुर्लभ किस्म का मशरूम है। इस बार यह ज्यादा पाई जा रही है। बताते हैं कि आसमान के गरजने से यह जमीन से फूट कर बाहर आ जाती है। यह दुनिया की सबसे मंहगी सब्जी है।
जब आकाशीय बिजली व गर्जना होती है तो यह जमीन से स्वंय फूट पड़ती है। यह कैसे उगती है? इसकी जिज्ञासा और रुचि आम व्यक्ति के लिए तो रहस्यमय है ही वैज्ञानिकों को भी इसे उगाना चुनौतिपूर्ण है। जिसके कारण वैज्ञानिक भी इसकी अविरत खोज में लगे हैं। गुच्छी मंडी,शिमला,कुल्लू,चंबा के जंगलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिकतर पाई जाती है।
पेड़-पौधों के कटान के कारण सालदर साल गुच्छी की मात्रा भी कम होती जा रही है।अत: कहा जा सकता है कि गुच्छी के फूटने में वृक्षों का योगदान अद्वितीय है। समाजसेवी शिवलाल(दीपु) का कहना है कि जहा-जहां भी गुच्छी पाई जाती है। वहां के गांव वासी सुबह ही गुच्छी की तलाश में निकल जाते हैं। किसी को दिनभर तलाश करने के बाद कम तो किसी को अधिक गुच्छी मिलना एक लॉटरी लगने के समान है। अत: यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि गुच्छी ढूंढना बहुत मुश्किल काम है।

गुच्छी अधिकतर नमी वाले स्थान पर पाई जाती है गुच्छी चार रंग की होती है।बरसात में सफेद रंग की,माघ में काले रंग की,मार्च-अप्रैल में हल्के पीले-सफेद रंग की तथा बरसात से पूर्व काले सफेद मिश्रित रंग की। ग्रामीणों की आर्थिकी में गुच्छी का बहुत योगदान है। गुच्छियों को इकट्ठा कर इसके भूमि के साथ लगे भाग से मिट्टी अलग की जाती है।इस बार गुच्छी दूसरे सालों की अपेक्षा ज्यादा मली रही है। फिर इसका हार बनाकर इन्हें सुखाया जाता है। प्रति किलोग्राम दर से गुच्छी खरीद कर 15,000 रुपये से 20,000 रुपये तक प्रति किलोग्राम की दर से थोक व्यापारियों को गुच्छी बेच देते हैं।
गुच्छी के व्यापारी का कहना है कि थोक व्यापारी गुच्छियों के आकार के आघार पर ग्रेड बनाकर इसके तने व सिर को अलग-अलग पैैक कर स्विट्जरलैंड, जापान,चीन जैसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचते हैं। गुच्छी में पोटेशियम,विटामिन और कॉपर होता है।यह एंटी आक्सीडैंट गुणों से भरपूर है।डायबिटीज और बैड कॉलीस्ट्राल को कम करती है। हड्डियों को मजबूत बनाती है।एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण गठिए को कम करती है।कैंसर रोधी गुणों के कारण स्तन कैंसर में फायदेमंद है।गुर्दों के लिए लाभदायक है।
पौष्टिक तत्वों से भर पूर यह मशरूम से कई बीमारियां दूर होती है। औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी के नियमित सेवन से हृदय रोग नहीं होता है। ह्रदय रोगियों को गुच्छी के सेवन से लाभ होता है। गुच्छी मशरूम के सेवन से कई घातक बीमारियां दूर होती हैं। इसका प्रयोग कई प्रकार की दवा बनाने में किया जाता है। आज के दौर में अधिकतर लोग गुच्छी के गुणों से अनजान हैं । इसलिए इसका पूरा फायदा नहीं उठाया जा रहा है । यह ऊंचे पहाड़ी इलाके के घने जंगलों में कुदरती रूप से पाई जाती है। जंगलों की अंधाधुंध कटान के कारण यह काफी कम मात्रा में मिलती है। यह सबसे महंगी सब्जी है इसका दाम ₹25000 प्रति किलोग्राम से अधिक है। इसका सेवन सब्जी के रूप में किया जाता है। बड़े होटलों में इसकी सप्लाई होती है । यह विटामिन सी से भरपूर होती है इसके सेवन से कई बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। इसमें विटामिन बी सी डी के प्रचुर मात्रा में होता है । तथा मोटापा सर्दी-जुकाम से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है ।यह प्रोस्टेट स्तन कैंसर की आशंका को कम करने से रोकना, टयूमर बनने से रोकना, कीमोथेरेपी से आने वाली कमजोरी दूर करने में सहायक, सूजन दूर करने में लाभदायक होता है।
आपको जानकर आश्चर्यचकित होंगे कि हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को गुच्छी मशरूम बेहद पसंद हैं।
