हिमाचल में पेड़ पर लगने वाली कचनार फूल जितना सुंदर होता है, उतना ही महत्वपूर्ण भी हैं। जानिए आयुर्वेद में क्या हैं इस औषधीय पौधे के लाभ।शिमलाः2अप्रैल 2023
हिमाचल में पेड़ पर लगने वाली कचनार फूल जितना सुंदर होता है, उतना ही महत्वपूर्ण भी हैं। जानिए आयुर्वेद में क्या हैं इस औषधीय पौधे के लाभ।
शिमलाः2अप्रैल 2023
देवभूमि हिमाचल में कई ऐसी जड़ी बूटियां है जिनका इस्तेमाल न केवल दवाईयों के लिए बल्कि सब्जी के लिए भी होता है। एक ऐसी ही सीजन में खाने वाली सब्जी है कचनार (कराली) जो मार्च -अप्रैल में में पेड़ पर लगती है। कचनार पेड़ में की टहनियों में लगती है। कचनार की लकड़ी इंधन के काम आती है जबकि पत्तियां पशुओं के पसन्दीदा चारे के रूप में प्रयोग लाई जाती है। जब पेड़ की टहनियों में कलियां व फूल लगते है ह तो वह सब्जी बनाने के काम आते हैं।
कराली के फूल की कई प्रकार की सब्जियां लोग बनाते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है। कचनार का प्रयोग आचार बनाने में भी किया जाता है। हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी जिलों खासकर गर्म इलाकों में आसानी से ये पेड़ मिल जाते हैं। यह पेड़ व इसके फूल कई रोगों का उपचार भी करते हैं। कचनार के फूल व कलियां बात रोग, जोड़ों के रोग के लिए लाभकारी मानी जाती है। इसके अलावा रक्त पित, फोड़े, फुंसियों की समस्याओं से भी यह कचनार की कलियां निजात दिलाती हैं।आयुर्वेद में औषधीय फूल है है कचनार, कैंसर के जोखिम को कम करने के साथ ही ये लाभ भी देता है कचनार फूल जितना सुंदर होता है, उतना ही महत्वपूर्ण भी हैं। जानिए आयुर्वेद में क्या हैं इस औषधीय पौधे के लाभ। कचनार के हैं ढ़ेरों स्वास्थ्य लाभ, इसे आहार में शामिल करें।

कचनार के बारे में आपने ज़रूर सुना होगा और इसके फूल दिखने में बेहद आकर्षक होते हैं। हालांकि यह सब्जी के रूप में काफी कम घरों में बनाई जाती है, लेकिन, इसके कई औषधीय लाभ हैं। जिनके बारे में आपको ज़रूर जानना चाहिए। कचनार के फूल से लेकर इसकी छाल तक, सब आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक हैं। इसका सेवन कई तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए भी किया जाता है। बायो-मेड रिसर्च इंटरनेशनल के एक ऑनलाइन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार कचनार के अर्क में मौजूद फाइटोकेमिकल्स में मानव कैंसर कोशिका लाइनों के खिलाफ शक्तिशाली जीवाणुरोधी गतिविधि और साइटोटोक्सिक क्षमता है। इसके अलावा, कचनार के पत्तों के अर्क में इसकी ओक्सीडेटिव डैमेज को कम करने की क्षमता होती है। जो कैंसर का एक बड़ा कारक है।कचनार एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है. इसका उपयोग कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है. कचनार की छाल से जड़ तक का उपयोग किया जाता है. इसमें एंटी-डायबिटिक, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-कैंसर, लैक्सेटिव, लिवर टॉनिक, एंटी-अल्सर, एंटीडोट जैसे गुण इसकी प्रभावशीलता को बढ़ाते हैं।
1 पाचन तंत्र में सुधार
पेट में गैस की समस्या होने पर आप कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। बस कचनार की छाल को पानी में डालें और आधा चम्मच अजवाइन मिलाकर इसे अच्छे से उबाल लें। सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से पेट फूलना, गैस, पेट दर्द आदि की तकलीफ दूर होती है।
2 रक्त को साफ करे
कचनार का सेवन करने से रक्त साफ होता है। इसके फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से बॉडी नैचुरली डिटॉक्स हो जाती है। जब आपका खून साफ रहेगा, तो अन्य बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे दाग-धब्बे और मुंहासे दूर रहते हैं। इसके अलावा रक्त विकार जैसे- दाद, खाज-खुजली, एक्जीमा, आदि के लिए भी कचनार की छाल का उपयोग किया जाता है। कचनार की खूबियों की वजह से इसके पेड़ पर पहाड़ी गाने भी बनाए गए है। एक गाना तो बहुत ही मशहूर है “बाट बमनुआ ओ राखा फुलियाँ कराली”। सफ़ेद, पीले, लाल रंग के फूल, गुलाबी रंग की धारियों के साथ बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं। आजकल आप यदि हिमाचल आ रहे हैं तो खेतों में आपको फूल खिले हुए कचनार के पेड़ दिख जाएंगे।
