नशा कारोबार पर शिमला पुलिस का बड़ा प्रहार, 70 लाख की अवैध संपत्ति फ्रीज
*चिट्टा तस्करों की कमाई पर चला कानून का शिकंजा, करोड़ों की संपत्ति जांच के दायरे में
*अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, नशा तस्करों की दौलत भी होगी जब्त: शिमला पुलिस
- नशे के नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने में जुटी पुलिस, 6 आरोपियों पर बड़ी कार्रवाई
शिमला जिला पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग NDPS मामलों में करीब 70 लाख रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियों को फ्रीज किया है। पुलिस का कहना है कि अब नशा तस्करों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्तियों पर भी सीधा प्रहार किया जा रहा है।
पहला मामला रामपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां फरवरी 2025 में हेरोइन (चिट्टा) बरामदगी के बाद पुलिस ने गहन जांच के दौरान ड्रग सप्लाई नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में कई अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें भी NDPS Act की धारा 29 के तहत गिरफ्तार किया गया। वित्तीय जांच में तीन आरोपियों की करीब 32 लाख रुपये की संपत्तियां चिन्हित की गईं, जिनमें लग्जरी वाहन, सोना और अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं। इन्हें विधि अनुसार फ्रीज कर दिया गया है।

दूसरा मामला आरोपी चेतन चौहान से संबंधित है, जिसके खिलाफ पहले से NDPS Act के तहत मामले दर्ज थे। PIT-NDPS Act के तहत निरोधात्मक कार्रवाई के बाद उसकी आर्थिक गतिविधियों की जांच की गई। जांच में करीब 38 लाख रुपये की अवैध संपत्ति सामने आई, जिसमें ट्रक, कार, 74 ग्राम सोना, बैंक खाते और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं। इन पर भी फ्रीजिंग की कार्रवाई अमल में लाई गई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के पास आय का कोई वैध और ज्ञात स्रोत नहीं था, जबकि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने भारी संपत्ति अर्जित की। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह संपत्ति मादक पदार्थों की तस्करी से कमाए गए धन से खरीदी गई थी।
जिला पुलिस शिमला ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करी के आर्थिक ढांचे को खत्म करने के लिए भविष्य में भी वित्तीय जांच और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही चार मामलों में छह आरोपियों की लगभग 1.83 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है, जो जिले में इस दिशा में अब तक की सबसे प्रभावी कार्रवाई मानी जा रही है।

